Friday, July 5, 2013

सम सामयिक

श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी  

जगाकर राष्ट्र में नव चेतना
आज हो तुम दूर, है यह वेदना
पावन तुम्हारा ध्येय कितना
दूर है, कैसी अमिट विधि लेखना ?

काश्मीर हित तुमने चढ़ाई देह
आसाम याकि लद्दाख ओ फिर लेह
आज फिर खतरे में हिंदुस्तान है
लौट आओ फिर चिरंतन बस यही अरमान है !!

*

श्री दीन दयाल उपाध्याय 
व्यक्ति से बड़ा परिवारपरिवार से बड़ा समाजसमाज से बड़ा देशऔर देश से भी बढ़कर मानवता ! दीनदयाल चिरंतन चिंतन चिर शाश्वत प्रतिक्षण नूतन !
अखिल विश्व को मार्ग दिखाता  भ्रान्ति मिटाता,शान्ति प्रदाता !!
मानव धर्मसमाजिक न्याय दीन दयाल उप - अध्याय !
आज तिरोहित हुआ विचार राजनीति में इति अध्याय !! 
 

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नाना जी देशमुख
चोट पड़ती जब दिखी जे पी के तन पर
लाठियां खाई स्वयं ही ढाल बन कर |
देश नव निर्माण का संकल्प लेकर
बन दधीची चल पड़े थे आप तनकर |
शत नमन राजर्षि तुमको,
ज्योतिरूपा तुम अमर हो
हो नहीं केवल पथिक भर,
ध्येय पथ पावन डगर हो |


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स्वातंत्र वीर सावरकर  
तुज साथी मरण हे जनन, तुज बिना जनन हे मरण ! - 
जीवन वही है सार्थ सत,
जो देशहित होवे मरण !
यदि देश सेवा विरत तन
तो मरण का कर लूं वरण !!
यदि चाहते प्रहलाद हो, आल्हाद का आधार
यही भाव उर में धरें, तो नारायण अवतार !


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शुभ दीपावली
बन अजात अरि लोक संग्रही
एक एक कर दीप जलायें
भ्रष्ट तंत्र के अन्धकार से
भरत भूमि को मुक्त कराएं !
जीवन पुष्प बिखेरे सौरभ
मन में हों सुविचार
भारत मां के श्री चरणों में
अर्पण को तैयार !!
दीप पर्व मंगलमय, सुख के पुष्प बरसाए !
शुचिता का प्रकाश, हर मन में रम जाए !!

हार्दिक शुभ कामना !!

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धन तेरस
धन तेरस हो मंगल कैसे, जेब बनी ठन ठन गोपाल,
महल अटारी में धन वर्षा, शेष सभी तो हैं बेहाल !
जन का तंत्र अर्थ में बदला, थानेदार हुए बटमार,
इटली से आई इक देवी, बनकर सबकी तारणहार !
तारणहार करे उद्धार, या फिर सबका बंटाधार,
नाग नाथ बिल में जाए तो, सांप नाथ डसने तैयार !
देश देखता टुकुर टुकुर है, हर कुर्सी बैठे तक्षक,
कालिय नाग नाथने बाले, कब आओगे बन रक्षक !

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विजयादशमी
विजय का यह पर्व लाये विजय का वरदान !
सत्य जीते, हो पराजित दुष्ट का अभिमान !!
आज है मन में उमंगें, राम से रावण था हारा !
लंकिनी अट्टालिका से जीत पाई वन की धारा !!
रावण रथी था आसमां पर, ओ धरा रघुवीर न्यारे !
जो जमीं से जुड़ा रहता, जीत उसके पग पखारे !!
विजया दशमी की पूर्व संध्या पर सभी मित्रों को हार्दिक मंगल कामना !

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दुर्गापूजा -
जब जब महिषासुर द्वारा
जगती पर संकट आया है !
देवों ने अपनी शक्ति दे
दुर्गा रूप बनाया है !!

हम सब करते दुर्गा पूजा धूम धाम से
बिटिया दुर्गा जन्म पूर्व ही जाती काम से
भ्रूण परीक्षण करवा उसको पहुंचाते निज धाम
यह कलियुग है सभी असुर हैं, देवी का क्या काम ?
जब सतयुग में देव बनेगा मनुज अरे संसारी
तब ही दुर्गा माता उसकी नित्य करें रखवारी
आठ सेकड़ा महिलाओं पर नर हैं आज हजार
यह संख्या जब उलटी होगी तब दुर्गा अवतार !

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नव वर्ष मंगल कामना
फल आता हमेशा पंखुरी झर जाने के बाद
मिटने बालों की दम से ये दुनिया आवाद !

गीत तुम गाते रहो प्रिय
साज टूटे ताल रूठे
शब्द या फिर अर्थ चूके
किन्तु फिर भी
जीवन संगीत मैं
सपनीले मीत मैं
अतल सागर में
ले मोती आकार
करे नव वर्ष सब 
सपने साकार 

बुजदिली, गफलत औ निराशा से दूर
राष्ट्रजीवन में रहे जिजीविषा भरपूर
नव सम्बत्सर दे प्रभू नव संकल्प महान
नव चैतन्य भरे ह्रदय, सबका हो कल्याण !!

*

लोहड़ी शुभ कामना
प्रभुजी दिया था तुमने जो नर तन,
बीता पूरा वृथा करते स्वार्थ नर्तन !!
लो हरी स्वीकारो मम मन,
लोहरी पर लो अपनी शरण,
करूं भजन दिन रैन,
स्वीकारो निज जन !


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